Virat Kohli Frist cenchury | विराट कोहली का पहला इंटरनेशनल शतक लगाने की कहानी #विराट #कोहली #शतक
हैलो दोस्तों तो यहाँ विराट कोहली के पहले अंतरराष्ट्रीय शतक और उससे जुड़ी उस भावनात्मक कहानी का विस्तृत वर्णन है, जिसने न केवल एक 'रन मशीन' के उदय का संकेत दिया, बल्कि भारतीय क्रिकेट में टीम भावना की एक बेमिसाल मिसाल भी पेश की।
ईडन गार्डन्स का वह ऐतिहासिक दिन: विराट कोहली का पहला शतक और गंभीर का बड़ा दिल
क्रिकेट के इतिहास में कुछ पारियां ऐसी होती हैं जो सिर्फ रिकॉर्ड बुक्स में दर्ज नहीं होतीं, बल्कि वे एक नए युग की शुरुआत करती हैं। 24 दिसंबर 2009 की शाम, कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेली गई पारी ऐसी ही थी। यह वह दिन था जब दुनिया ने पहली बार विराट कोहली के बल्ले की असली गूंज सुनी थी। यह कहानी सिर्फ 107 रनों की नहीं है; यह कहानी एक युवा खिलाड़ी के आत्मविश्वास, दबाव में बिखरने के बजाय निखरने, और एक सीनियर खिलाड़ी (गौतम गंभीर) की दरियादिली की है।
आज जब हम विराट कोहली को 'किंग कोहली' और 'चेज़ मास्टर' के रूप में जानते हैं, तो उस सफर की नींव इसी मैच में पड़ी थी। आइये, उस मैच और उससे जुड़ी कहानी को विस्तार से जानते हैं।
1. मैच की पृष्ठभूमि: दबाव और उम्मीदें
साल 2009 में श्रीलंका की टीम दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में से एक थी। कुमार संगकारा की कप्तानी वाली इस टीम में तिलकरत्ने दिलशान, सनथ जयसूर्या, और लसिथ मलिंगा जैसे दिग्गज शामिल थे। भारत और श्रीलंका के बीच 5 मैचों की वनडे सीरीज चल रही थी।
भारत सीरीज में 2-1 से आगे था, लेकिन चौथा मैच कोलकाता में था। ईडन गार्डन्स का इतिहास रहा है कि यहाँ दर्शकों का दबाव खिलाड़ियों पर सबसे ज्यादा होता है। रौशनी में खेले जा रहे इस डे-नाइट मैच में टॉस जीतकर श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया।
2. श्रीलंका का विशाल स्कोर
श्रीलंका ने बल्लेबाजी शुरू की और भारतीय गेंदबाजों की जमकर खबर ली। उपुल थरंगा ने शानदार 118 रन बनाए और कप्तान कुमार संगकारा ने 60 रनों की पारी खेली। उस समय वनडे क्रिकेट में 300 से ज्यादा का स्कोर आज के मुकाबले बहुत बड़ा माना जाता था। 50 ओवर खत्म होने तक श्रीलंका ने बोर्ड पर 315 रन (6 विकेट के नुकसान पर) टांग दिए थे।
भारत को सीरीज जीतने के लिए 316 रन बनाने थे। ईडन गार्डन्स की लाइट्स के नीचे, मलिंगा और कुलशेखरा जैसे गेंदबाजों के सामने यह लक्ष्य पहाड़ जैसा लग रहा था।
3. भारत की खराब शुरुआत और सन्नाटा
316 रनों का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत किसी बुरे सपने से कम नहीं थी।
* वीरेंद्र सहवाग: विस्फोटक सहवाग सिर्फ 10 रन बनाकर सुरंगा लकमल का शिकार बने।
* सचिन तेंदुलकर: क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर भी सिर्फ 8 रन बनाकर आउट हो गए।
स्कोर बोर्ड पर सिर्फ 23 रन थे और भारत के दो सबसे बड़े मैच विनर पवेलियन लौट चुके थे। ईडन गार्डन्स में, जहाँ 90,000 से ज्यादा दर्शक मौजूद थे, वहां एकदम सन्नाटा छा गया था। किसी को उम्मीद नहीं थी कि भारत अब यह मैच बचा पाएगा।
यहीं पर एंट्री हुई 21 साल के एक युवा लड़के की, जिसका नाम था—विराट कोहली। उस समय विराट टीम में अपनी जगह पक्की करने के लिए संघर्ष कर रहे थे। उन्हें चोटिल युवराज सिंह की जगह नंबर 4 पर भेजा गया था।
4. विराट और गंभीर: एक ऐतिहासिक साझेदारी
जब विराट क्रीज पर आए, तो दूसरे छोर पर दिल्ली के ही उनके साथी गौतम गंभीर मौजूद थे। गंभीर ने विराट को समझाया कि अभी मैच खत्म नहीं हुआ है। दोनों ने धीरे-धीरे पारी को संवारना शुरू किया।
विराट की बल्लेबाजी शैली:
उस दिन विराट के खेल में एक अलग परिपक्वता (Maturity) दिख रही थी। उन्होंने हड़बड़ी नहीं दिखाई। उन्होंने मलिंगा की यॉर्कर को सम्मान दिया और स्पिनरों के खिलाफ अपने कलाई के उपयोग से बेहतरीन शॉट्स खेले। उन्होंने हवा में शॉट खेलने के बजाय जमीन के सहारे रन बनाने पर जोर दिया, जो आगे चलकर उनकी 'चेज़िंग स्टाइल' का ट्रेडमार्क बन गया।
गौतम गंभीर, जो सीनियर थे, लगातार विराट से बात कर रहे थे। वे हर ओवर के बाद विराट के पास जाते और उन्हें फोकस बनाए रखने के लिए कहते। देखते ही देखते दोनों के बीच 50, फिर 100 और फिर 200 रनों की साझेदारी हो गई।
जैसे-जैसे साझेदारी बढ़ी, ईडन गार्डन्स का शोर वापस लौटने लगा। जो दर्शक निराश होकर घर जाने की सोच रहे थे, वे अब अपनी सीटों पर खड़े होकर तालियां बजा रहे थे।
5. वह जादुई पल: पहला शतक
पारी के आगे बढ़ते ही विराट कोहली 90 के फेर में पहुंच गए। एक युवा खिलाड़ी के लिए नर्वस नाइंटीज (90s) बहुत मुश्किल होते हैं, लेकिन उस दिन विराट के इरादे पक्के थे।
आखिरकार, वह पल आया। विराट ने एक रन चुराया और अपने वनडे करियर का पहला शतक पूरा किया।
* स्कोर: 107 रन
* गेंदें: 114
* चौके: 11
* छक्के: 1
हेलमेट उतारकर, बल्ले को हवा में लहराते हुए विराट के चेहरे पर जो राहत और खुशी थी, वह देखने लायक थी। यह सिर्फ एक शतक नहीं था, यह एक घोषणा थी कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य सुरक्षित हाथों में है। हालांकि, शतक बनाने के कुछ देर बाद वे आउट हो गए, लेकिन तब तक उन्होंने भारत को जीत की दहलीज पर पहुंचा दिया था।
गौतम गंभीर अंत तक टिके रहे और नाबाद 150 रन बनाकर भारत को 7 विकेट से शानदार जीत दिलाई। भारत ने 316 का लक्ष्य 48.1 ओवर में ही हासिल कर लिया।
6. वह कहानी जिसने सबका दिल जीत लिया।
मैच खत्म हो चुका था। भारत जीत चुका था। अब बारी थी 'पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन' (पुरस्कार वितरण समारोह) की।
नियमों और आंकड़ों के हिसाब से 'मैन ऑफ द मैच' (Man of the Match) का असली हकदार गौतम गंभीर को माना जा रहा था। और ऐसा हुआ भी।
* गंभीर ने नाबाद 150 रन बनाए थे।
* उन्होंने मैच को फिनिश किया था।
* उन्होंने कठिन समय में टीम को संभाला था।
जब कमेंटेटर रवि शास्त्री ने 'मैन ऑफ द मैच' के लिए गौतम गंभीर का नाम पुकारा, तो गंभीर आगे आए। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने इस मैच को इतिहास में अमर कर दिया।
गंभीर का त्याग:
गौतम गंभीर ने माइक थामते ही कहा, "मैं यह अवॉर्ड विराट कोहली को देना चाहता हूं।"
वहाँ मौजूद रवि शास्त्री और लाखों दर्शक हैरान रह गए। गंभीर ने आगे समझाया:
"मैंने 150 रन बनाए हैं, लेकिन विराट ने जिस तरह का दबाव झेला और मेरे साथ साझेदारी की, वह काबिले तारीफ है। यह उसका पहला शतक है। एक युवा खिलाड़ी के लिए उसका पहला इंटरनेशनल शतक बहुत मायने रखता है। मुझे लगता है कि इस अवॉर्ड की जरूरत उसे मुझसे ज्यादा है, ताकि उसका आत्मविश्वास बढ़े।"
गंभीर ने न केवल वह ट्रॉफी, बल्कि उसके साथ मिलने वाली चेक राशि भी विराट कोहली को सौंप दी। 21 साल के विराट कोहली के लिए यह एक भावुक पल था। एक सीनियर खिलाड़ी द्वारा अपने प्रदर्शन का श्रेय एक जूनियर को देना क्रिकेट में बहुत कम देखा जाता है।
7. विराट पर इस घटना का प्रभाव
विराट कोहली ने बाद के कई साक्षात्कारों (Interviews) में इस घटना का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि उस दिन उन्हें महसूस हुआ कि वह इस टीम का हिस्सा हैं और सीनियर खिलाड़ी उनकी परवाह करते हैं।
विराट ने एक बार 'ब्रेकफास्ट विद चैंपियंस' शो में कहा था:
"मैं उस दिन बहुत खुश था क्योंकि मैंने अपना पहला शतक लगाया था। लेकिन जब गौती भाई (गंभीर) ने मुझे अपना अवॉर्ड दिया, तो वह मेरे लिए शतक से भी बड़ी बात थी। उसने मुझे सिखाया कि टीम के लिए खेलना क्या होता है और एक सीनियर के तौर पर आपकी क्या जिम्मेदारी होती है।"
यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने विराट के अंदर वह आत्मविश्वास भरा, जिसकी बदौलत उन्होंने आगे चलकर सचिन तेंदुलकर के 49 शतकों का रिकॉर्ड तोड़ा और 50 वनडे शतक लगाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बने।
8. निष्कर्ष: एक लीजेंड का जन्म
24 दिसंबर 2009 की वह रात सिर्फ भारत की जीत की रात नहीं थी, बल्कि वह 'चेज़ मास्टर' के जन्म की रात थी। उस पारी ने दिखाया कि विराट कोहली बड़े लक्ष्य का पीछा करते समय कितने खतरनाक हो सकते हैं।
* आंकड़े: 107 रन, 114 गेंदें।
* सबक: टीम स्पिरिट और निस्वार्थता।
* परिणाम: एक ऐसा खिलाड़ी मिला जो अगले डेढ़ दशक तक विश्व क्रिकेट पर राज करने वाला था।
गौतम गंभीर का वह 150 रन का स्कोर शायद लोग भूल जाएं, लेकिन उनका वह 'जेस्चर' (Gesture) और विराट का वह पहला शतक क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। उस मैच ने साबित किया कि क्रिकेट सिर्फ रन बनाने का खेल नहीं है, बल्कि यह चरित्र और संस्कारों का भी खेल है।
आज जब हम विराट कोहली के 84 शतकों की बात करते हैं, तो हमें उस पहले शतक को जरूर याद करना चाहिए, जिसकी नींव एक सीनियर खिलाड़ी के भरोसे और त्याग पर रखी गई थी।
बहुत बहुत धन्यवाद 🙏🏻
@chandrakumar
©Chandrakumar
Facebook _ Chandra Kumar
YouTube _ FFxChandra
Please help 🙏🏻

टिप्पणियाँ